Thursday, 28 December 2017

Tulsidas Ke Dohe in Hindi | तुलसीदास के दोहे अर्थ सहित

Posted by Ajay Sharma
Tulsidas Ke Dohe in Hindi  : श्री रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास हिन्दी साहित्य के महान रचनाकार हैं जिस प्रकार उनकी सभी रचनाएँ प्रसिद्ध हैं ठीक उसी प्रकार तुलसीदास के दोहे भी काफी प्रसिद्ध हैं उनके दोहे गागर में सागर का काम करते हैं | तुलसीदास जी ने अपने दोहों में श्री राम के प्रति अपनी आस्था को प्रकट करने के साथ साथ उनकी भक्ति पर भी जोर दिया है | तो चलिए इस अध्याय में हम सन्त तुलसीदास के दोहे अर्थ  सहित पढ़ते हैं -

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Tulsidas Ke Dohe in hindi

Tulsidas Ke Dohe in Hindi | तुलसीदास के दोहे अर्थ सहित hindi में


दोहा 1 :-
तुलसी देखि सुबेषु भूलहिं मूढ़ न चतुर नर
सुंदर केकिहि पेखु बचन सुधा सम असन अहि ||

अर्थ :- तुलसीदास जी कहते हैं की सुंदर वेष को देखकर न केवल मुर्ख लोग बल्कि चतुर लोग भी दोखा खा जाते हैं | ऐसे में सुंदर पंखो वाले मोर को ही देख लो उसका वचन तो अमृत के समान है परन्तु  भोजन साप का है |


दोहा 2 :-
सहज सुहृद  गुर स्वामि सिख जो न करइ सिर मानि
सो  पछिताइ  अघाइ उर  अवसि होइ हित  हानि ||

अर्थ :- तुलसीदास जी कहते हैं की जो व्यक्ति स्वाभाविक रूप से उसका भला चाहने वाले गुरु और स्वामी की बात को नही मानता उसको बाद में ह्रदय से पछताना पड़ता है और उसके हित की हानि अवश्य ही होती है |


दोहा 3 :-
मुखिया मुखु सो चाहिऐ खान पान कहुँ एक
पालइ पोषइ सकल अंग तुलसी सहित बिबेक ||

अर्थ :- तुलसीदास जी कहते हैं की मुखिया को मुंह के समान होना चाहिए जो खाने पिने के लिए तो अकेला है परन्तु विवेकपूर्ण तरीके से सभी अंगो को पालता और पोषता है |


दोहा 4 :-
आवत ही हरषै नहीं नैनन नहीं सनेह
तुलसी तहां न जाइये कंचन बरसे मेह||

अर्थ :- तुलसीदास जी कहते हैं जहाँ आपके जाने पर लोग खुश नही होते और आपके लिए आँखों में स्नेह या प्रेम न हो | तो वहाँ आपको नही जाना चाहिए , चाहे वहां धन की ही बारिश क्यों न हो रही हो |


दोहा 5 :-
तुलसी नर का क्या बड़ा, समय बड़ा बलवान
भीलां लूटी गोपियाँ, वही अर्जुन वही बाण ||

अर्थ :- तुलसीदास जी समय की महता पर प्रकाश डालते हुए कहते हैं की समय बड़ा बलवान होता है , मनुष्य का बड़ा या छोटा होना समय के आगे कुछ नही है | इस पर तुलसीदास जी अर्जुन का उदाहरण लेते हुए कहते हैं की जब अर्जुन का समय ख़राब हुआ तो भील गोपियों को लूट रहे थे और अर्जुन कुछ नही कर पाए |


तो दोस्तों आशा करता हूँ की आपको संत Tulsidas ke dohe in hindi में पसंद आए होंगे और यदि आपको तुलसीदास जी के और दोहे अर्थ सहित पढने हैं तो  tulsidas ke dohe पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं |

और साथ ही निचे Comment करके ये भी बताएं की आपको तुलसीदास जी के ये दोहे कैसे लगे | धन्यवाद !