Tuesday, 7 February 2017

दुसरो को निचे गिराने में खुद का ही नुकसान होता है Moral Story

Posted by Ajay Sharma
दोस्तों कल मै एक अख़बार पढ़ रहा था जिसका नाम अमर उजाला है और उस अख़बार के एक कॉर्नर ( कोने ) में एक कहानी दी गई थी जिसका title था की " दुसरो को गिराने में खुद का ही नुकसान होता है " | मेरे मन में उस कहानी को पढने की तीव्र इच्छा हुई और मै सब कुछ छोडकर उस कहानी को पढने लगा |

कहानी को पढने के बाद मुझे बहुत ही positive महसूस हुआ और एक शिक्षा भी मिली की हमारा मुकाबला सिर्फ खुद से ही होना चाहिए दुसरो से नही |


मै उस motivational story को आप लोगो के साथ share करने जा रहा हूँ यदि आपको भी ये कहानी पसंद आए तो आप भी इस कहानी को अपने दोस्तों को और उन लोगो को share जरुर करें जिनका आप भला चाहते हैं |
आइए कहानी पर प्रकाश डालते हैं -

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दुसरो को गिराने में खुद का ही नुकसान होता है हिन्दी story

ये कहानी रेहान की है जो की एक बहुरास्ट्रीय कंपनी ( MNC ) में टीम लीडर थे | एक दिन रेहान को अचानक से ये महसूस हुआ की उनकी टीम के लोग एक दुसरे जलते हैं और आपस में एक दुसरे को निचा दिखाने में लगे रहते हैं | जिसके कारण पूरी टीम का कार्य प्रभावित हो रहा था |

रेहान को इससे बहुत चिंता हुई और उन्होंने इस समस्या का हल निकालने के लिए एक तरकीब सोची | उन्होंने  अपनी टीम के सभी सदस्यों के लिए एक साइकिल रेस का आयोजन किया | और टीम के हर सदस्य के पास जाकर रेहान ने उनको उनका लक्ष्य बताया |

अगले दिन सभी लोग अपनी अपनी साइकिल लेकर उस जगह पर पहुंच गए जहाँ रेस होने वाली थी | ये ऐसा इलाका था जहाँ पर बहुत सारी गलियां थी | और रेहान ने रेस के लिए इस इलाके  को जान - बुझकर चुना था | इसके साथ ही उन्होंने टीम के हर सदस्य के लिए अलग अलग गली में लक्ष्य रखा था |

रेस शुरू हुई तो सभी अपना पूरा दम लगाकर एक दुसरे से आगे निकलने की होड़ में लग गए किसी ने बाएँ से निकलने की कोशिश की तो किसी ने दाएँ से | यहाँ तक की कुछ तो एक दुसरे को साइकिल से निचे गिराने में कामयाब भी हो गए | 10 minute बाद जब रेस खत्म होने का बिगुल बजा तो सभी प्रतिद्वंदी एक दुसरे पर आरोप लगते हुए रेहान के पास पहुंचे |

कुछ ही समय बाद रेस का परिणाम घोषित हुआ और रेस का परिणाम सुनकर सभी का गुस्सा सातवें आसमान पर जा टिका क्योंकि सभी को रेस से डिसक्वालिफाई कर दिया गया था | केवल एक सदस्य जो बीमारी के कारण साइकिल को चला ही नही पाया था उसको रेस का विजेता घोषित कर दिया गया क्योंकि वही इकलौता सदस्य था जिसको डिसक्वालिफाई नही किया गया था |

परिणाम को सुनकर सभी सदस्य बहुत ही क्रोधित हुए किसी को कुछ भी समझ नही आ रहा था | तभी रेहान बोले मुझे रेस का परिणाम शुरू से हो पता था | मुझे पता था की यही होने वाला है | और इसका मूल कारन है आप लोगो का अपने लक्ष्य पर focus का न होना |

मैंने जान भुझकर सभी लोगो के लिए अलग अलग गलियों में लक्ष्य रखा था सबका रास्ता अलग था | हर कोई आसानी से अपने लक्ष्य तक पहुंच सकता था | आपमें से प्रत्येक व्यक्ति विजेता बन सकता था | परन्तु फिर भी ऐसा नही हुआ क्योंकि आप सभी लोग दुसरो के कामो में दखल अंदाजी कर रहे थे और नतीजतन किसी को कुछ भी नही मिला |

यहीं सब हमारी कंपनी के साथ हो रहा है , हम सब एक टीम हैं और कंपनी के अलग अलग कार्यों के लिए सबकी जरूरत है | परन्तु आपसी रंजिश और एक दुसरे को निचा दिखाने की होड़ में न तो कंपनी का कोई विकास हो रहा है और न ही आपका |

यदि आप जीवन में कुछ हासिल करना चाहते हैं तो खुद से लड़िये दुसरो से नही | दूसरों से लड़ने में आप अपना ही नुकसान कर बैठेंगे क्योंकि जब आप दूसरों को निचा दिखाने के लिए अपने दिमाग को खर्च करते हैं तो आपके मन में सदा वैसी ही भावना आती जाएँगी और आपमें कुछ अलग करने की तो दूर की बात सोचने की शक्ति भी नही रहेगी |

इसलिए मै आपसे यही कहना चाहता हूँ की अपने कीमते समय को दूसरों की कमियों को ढूंढने में न गवाएं बल्कि अपनी कमियों को दूर करने में इस्तेमाल करें |

तो दोस्तों ये कहानी थी रेहान और उनकी टीम की | यही बाते हम पर भी लागु होती हैं की यदि हम दूसरों को निचे गिराने की कोशिश करेंगे तो हमारा भी नुकसान होना तय है क्योंकि ये बात 100 % सच है की हम जैसा सोचते हैं हमारा दिमाग बिल्कुल वैसा ही हो जाता है |

तो अगर ये कहानी आपको थोड़ी सी भी पसंद आई हो तो please निचे दिए गए button पर क्लिक करके facebook तथा twitter पर share जरुर करें | धन्यवाद ! 

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